Types Of Hormones And Their Receptors

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Types Of Hormones And Their Receptors

Classification Of Hormone Receptors

शरीर में दो मुख्य प्रकार के regulatory systems होते हैं, neurological system एवं endocrine system । इनमें, neurological system के neurons तो जिन cells पर उन्हें कार्य करना है (target अथवा effector cells) उनसे directly जुड़े होते हैं एवं सीधे-सीधे उनको प्रभावित कर उनपर अपना प्रभाव उत्पन्न करा देते हैं। इसके विपरीत, endocrine system में secrete होने वाले hormones, systemic circulation में ही release करा दिए जाते हैं जिसके द्वारा वह सम्पूर्ण शरीर की सभी cells तक पहुँचते रहते हैं। जरा सोचो, किसी target cell से सम्बद्ध हुए बिना ही यह कैसे संभव हो पाता है कि किसी hormone का प्रभाव शरीर की कुछ ही cells पर उत्पन्न हो, अन्य किसी में नहीं? स्वाभाविक रूप से ऐसे में कोई न कोई व्यवस्था अवश्य होती होगी जिसके द्वारा या तो वह hormone अपनी target cell को पहचान सके अथवा वह target cell उस hormone को, जिसको उसके ऊपर कार्य करना है। यह ठीक उसी प्रकार हुआ जैसे किसी landline phone में तो electromagnetic waves, wires के माध्यम से सीधे-सीधे अपने target telephone set तक ही पहुंचती हैं किसी अन्य पर नहीं, परन्तु mobile phone की electromagnetic waves तो पूरे network area में फैल जाती हैं जो उस area के सभी mobile phones तक पहुंचती हैं परन्तु connect केवल उसी phone से होती हैं जिसकी frequency, electromagnetic waves से match कर रही हो। इसी तथ्य को इस प्रकार भी कहा जा सकता है कि कोई hormone किस cell पर कार्य करेगा एवं किस पर नहीं, यह उस hormone पर निर्भर न होकर उन्हीं cells पर ही होता है जिन पर उस hormone को receive करने की उपयुक्त व्यवस्था होती है। किसी cell में hormone को receive करने की इसी व्यवस्था को receptor कहते हैं। प्रत्येक hormone के कार्य करने के लिए उस hormone का एक विशिष्ट receptor होता है। शरीर की जिन cells में किसी hormone के यह विशिष्ट receptor उपस्थित होंगें, केवल वही cells उस hormone के द्वारा प्रभावित हो सकेंगीं। अधिकाँश cellular structures की ही भांति यह hormone receptors भी proteins के ही बने होते हैं। किसी एक cell पर इन receptors की संख्या 2000 से लेकर 10000 तक हो सकती है।

कुछ metabolically active cells, अनेकों hormones द्वारा नियंत्रित हो सकती हैं। जरा सोचो, ऐसी cells में इन अनेकों hormones के हजारों receptors किस प्रकार व्यवस्थित हो सकेंगें? इसीलिए, कुछ hormone receptors तो cell membrane पर ही उपस्थित रहते हैं जबकि कुछ अन्य को cell के भीतर व्यवस्थित करा दिया जाता है। जरा सोचो, किस hormone का receptor, cell के किस भाग में स्थित होगा, क्या इसका भी कोई नियम होगा? इसको तुम एक ऑफिस के उदाहरण से भी समझ सकते हो। किसी ऑफिस में किसी व्यक्ति को किस स्थान पर रिसीव किया जायेगा यह उस तथ्य पर निर्भर करता है कि उस ऑफिस में प्रवेश करने की कितनी authority उस व्यक्ति में है। जो hormones, cells के भीतर सरलता से प्रवेश कर सकते हैं, वह तो intracellular receptors पर भी कार्य कर सकते हैं। इसके विपरीत, जो hormones, cell membrane को पार नहीं कर सकते, उनके receptors को cell membrane पर ही उपस्थित होना पड़ता है। तुम जानते ही हो कि lipid based molecules, lipid soluble होने के कारण cell membrane को सरलता से पार करते हुए सीधे cytoplasm तक पहुँच सकते हैं। इसीलिए, lipid based hormones (steroid hormones) के receptors भी cytoplasm में ही उपस्थित होते हैं। इसके विपरीत, proteinaceous hormones (proteins, peptides एवं catecholamines), cell membrane cross नहीं कर पाते अतः उनके receptors, cell membrane पर ही उपस्थित होते हैं। Thyroid hormones न केवल cell membrane को सरलता से पार कर जाते हैं बल्कि nuclear membrane से भी होकर nucleus के भीतर तक पहुँच सकते हैं। इसीलिए इनके receptors, intranuclear एवं genes के ठीक ऊपर ही होते हैं।

Classification of hormone receptors

Cell surface receptors – Located in or on the cell membrane

• Proteinaceous hormones

• Peptide hormones

• Catecholamines

Intracytoplasmic receptors – Located within the cytoplasm

• Steroid hormones

Intranuclear receptors – Located within the nucleus

• Thyroid hormones

Regulation of hormone receptors

तुम जानते ही हो कि किसी ऑफिस में किसी व्यक्ति को कितनी आत्मीयता के साथ रिसीव किया जायेगा यह इस तथ्य पर निर्भर करता है कि उस ऑफिस में उस व्यक्ति की कितनी आवश्यकता है। यदि उस ऑफिस को चौकीदारों की आवश्यकता है तब चौकीदारी की भर्ती के लिए आने वालों को रिसीव करने के काउंटर बढ़ा दिए जायेंगें जबकि क्लर्क की आवश्यकता होने पर क्लर्क की भर्ती के काउंटर। इसी प्रकार, किसी cell में भी जिस hormone के action की आवश्यकता जितनी अधिक होती है, उस cell में उस hormone के receptors की संख्या भी उतनी ही बढ़ा ली जाती है जिससे उस hormone का अधिक प्रभाव प्राप्त किया जा सके। इस प्रक्रिया को upregulation of receptors कहते हैं। इसी प्रकार, blood में किसी hormone की मात्रा बढ़ने पर जब उसका action सामान्य से अधिक होने लगता है तब शरीर द्वारा सर्वप्रथम तो उस hormone की मात्रा को घटाने का प्रयास किया जाता है परन्तु यदि ऐसा कर पाना पूर्णरूप से संभव न हो सके तब cells उस hormone के receptors की संख्या को ही घटा दिया जाता है जिससे उस hormone के प्रभाव को घटाया जा सके। इस प्रक्रिया को downregulation of receptors कहते हैं। आओ समझते हैं की receptors को घटाने की यह प्रक्रिया किस-किस प्रकार से संपन्न की जा सकती है।

1. Receptor की synthesis घटाकर

2. Receptor का degradation बढाकर

3. Receptor को उसकी exposed स्थिति से कहीं अलग हटाकर जहाँ वह hormone के संपर्क में न आ सके। इसे internalization of receptor कहते हैं।

4. Receptor को किसी प्रकार से inactivate कराकर

5. Receptor से hormone के संपर्क में आने के बाद जो प्रक्रियाएं आरम्भ होती हैं (postreceptor signaling), उनको घटाकर

इन्हीं प्रक्रियाओं को उल्टा करने से receptors का upregulation भी कराया जा सकता है। 

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Dr. Pankaj Kumar Agarwal

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