Clinical Case 1,1 - High Risk Individuals For Development Of Type 2 Diabetes

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Clinical Case 1,1 - High Risk Individuals For Development Of Type 2 Diabetes

Dr Pankaj Kumar Agarwal

Clinical Case - किसी फ्री डाइबिटीज कैंप में एक 41 वर्षीय व्यक्ति की F/PP blood glucose values, 304/487 mg% निकलीं। वह इसे देख हर बहुत आश्चर्यचकित हुआ क्योंकि वह पूर्णरूप से स्वस्थ था। आइये इस व्यक्ति को treat करने के पहले उससे सम्बंधित कुछ clinically relevant facts की चर्चा करते हैं।

Query 1 - क्या diabetes होने के बाद कोई asymptomatic भी रह सकता है? यदि ऐसा है तब किन-किन लोगों को diabetes की screening करवानी चाहिए एवं कब-कब?

Suggestions - वास्तव में लगभग 50% type 2 diabetics, asymptomatic ही होते हैं। इसी कारण से वो काफी-काफी समय तक unnoticed hyperglycemia में ही रहने के कारण कई बार target organ damage के बाद ही diagnose हो पाते हैं। इस स्थिति में वह hyperglycemia से होने वाले प्रारंभिक लक्षणों (जैसे polyuria, polydipsia, polyphagia, generalised weakness एवं lethargy) के स्थान पर इन target organs के damage से होने वाले बिगड़े हुए लक्षणों के साथ दिखाने आते हैं। ध्यान रहे एक बार इन target organs के damage हो जाने के बाद इनको पूर्णरूप से ठीक कर पाना संभव नहीं होता। इसीलिए, apparently healthy population एवं विशेष रूप से high risk individuals को समय-समय पर blood glucose की routine screening कराते रहना चाहिए। Diabetes detection camps का वास्तविक योगदान इन्हीं व्यक्तियों को पहचानने में है।

Screening for diabetes

वह high risk individuals जिनको यह screening अवश्य करवानी चाहिए -

Obesity - ध्यान रहे, type 2 diabetes का risk बढ़ाने वाला सबसे महत्वपूर्ण factor है obesity । विश्व की अन्य ethnic populations की तुलना में वजन बढ़ने सेdiabetes का बढ़ने वाला risk, हम भारतीयों में सर्वाधिक है। इसीलिए, विश्व में जहाँ obesity कहलाने के लिए BMI का cutoff 25 kg/m2 माना जाता है, वहीँ हमभारतीयों में इसके दुष्परिणाम 23 kg/m2 से ही आरम्भ होने लग जाते हैं। इसलिए, प्रत्येक भारतीय को diabetes के लिए screening अवश्य करवानी चाहिएविशेषतयः उन लोगों को जिनमें निम्नांकित लक्षण भी साथ में हों।

First-degree relative with diabetes - अर्थात यदि उनके माता, पिता, भाई, बहन, बेटा अथवा बेटी को डाइबिटीज हो

Hypertension - यदि BP 140/90 mmHg से अधिक हो अथवा इसकी medicine ले रहे हों

Dyslipidemia - यदि HDL cholesterol 35 mg/dL से कम हो या triglyceride 250 mg/dL से अधिक हो

Insulin resistance से सम्बंधित लक्षणों के मिलने पर जैसे nape of neck में acanthosis nigricans

Polycystic ovary syndrome - क्योंकि यह disorder भी insulin resistance से ही सम्बंधित है

Physical inactivity - क्योंकि यह भी insulin resistance को बढ़ाता है

Prediabetes - यदि fasting plasma glucose 100 mg/dL से अधिक हो (impaired fasting glucose - IFG), यदि postprandial plasma glucose 140 mg/dLसे अधिक हो (impaired glucose tolerance - IGT) अथवा HbA1C 5.7% से अधिक हो

GDM - यदि किसी महिला को किसी pregnancy में GDM रह चुका हो

यद्यपि normal individuals में यह जांचें 45 वर्ष की उम्र के बाद प्रस्तावित हैं परन्तु भारतीयों में डाइबिटीज की संभावना अधिक होने के कारण जिस भी उम्र में यह लक्षण मिल रहे हों तभी यह screening करा लेनी चाहिए।

यदि प्रथम screening में glucose levels normal मिलें तब इनको प्रत्येक 3 वर्षों में दोबारा करवाते रहना चाहिए। Prediabetes, अर्थात डाइबिटीज की पूर्वावस्था, में डाइबिटीज होने की सम्भावना अत्यधिक होने के कारण इन जांचों को प्रत्येक वर्ष repeat करवाते रहना चाहिए। 

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Dr. Pankaj Kumar Agarwal

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