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डा पंकज कुमार अग्रवाल

रामायण की एक कथा है। भगवान श्रीराम ने रावण का वध करने के उद्देश्य से उसके सिर एक-एक कर के दर बार काट डाले परंतु एक सिर कटने के बाद तुरंत ही उसके स्थान पर दूसरा प्रकट हो जाता था। तब विभीषण ने उनको बताया कि रावण की नाभि में एक अमृतकुंड है। जैसे ही राम ने एक बाण मारकर कुंड को सोख लिया, रावण के नये सिर प्रकट होना बन्द हो गये व उसका अंत हो गया। 

मेटाबोलिक सिंड्रोम एक रावण के ही प्रकार की बीमारी है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड कोलेस्ट्रोल, हाई यूरिक एसिड (एवं उससे होने वाले जोड़ों के दर्द), लीवर मे चर्बी (fatty liver व high SGPT), पित्त की थैली में पथरी, खर्राटे भरना (sleep apnea), हार्ट अटैक, घुटने में गठिया (आर्थराईटिस) एवं पीठ दर्द (स्लिप डिस्क) एवं कुछ प्रकार के कैंसर (महिलाओं में ब्रेस्ट एवं यूट्रस का एवं पुरुषों में लिवर एवं पैंक्रियास का), इसके दस सिर हैं। मोटापा एवं जीवन शैली की गड़बड़ियाँ इसका अमृतकोष हैं, जो इन सब बीमारियों को हर बार एक नये रूप में उत्पन्न करती जाती हैं। 

अब देखना यह है कि इस मेटाबोलिक सिंड्रोम रूपी रावण से लड़ने के लिये आप क्या विधि अपनाते हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल इत्यादि रोगों के लिये अलग-अलग उपचार या उन सबको एक साथ काबू में करने के लिये मोटापा घटाना व जीवन शैली में नियंत्रण। 

याद रहे, यहां पर राम भी आप हैं और धनुष भी आप ही के हाथ है।

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Dr. Pankaj Kumar Agarwal

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